Title:-Bhāratīya Sāṃskṛtika Cintana ke Ādhārabhūta Tattva
Authors:-Dr. Devendra Singh Rajput
Page No. :-46-50 View & Download
Date of Publication (ONLINE) :-13-07-2026
DOI ; 10.71037/sanvahak.v2i3.07
How to cite this article:
Rajput Dr. Devendra Singh,”Bhāratīya Sāṃskṛtika Cintana ke Ādhārabhūta Tattva”, Sanvahak, Vol-2;Issue-3, July-Sept., 2026, Page No. :-46-50.
URL : https://sanvahak.gyanvividha.com/wp-content/uploads/2026/09/Dr.-Devendra-Singh-Rajput-Sanvahak-Vol-2-Issue-3-July-Sept.-2026-pp-46-50.pdf
Abstract : भारतीय ज्ञान परम्परा में मानवीय बौद्धिकता एवं अनुभव की एक समन्वित परम्परा एवं निरन्तरता है। जो विभिन्न क्षेत्रों के विचारकों रचनाओं एवं सिद्धान्तों से पुष्ट है। भारत की संस्कृति केवल धर्म, पूजा-पद्धति, भाषा, वेशभूषा अथवा त्योहारों तक सीमित नहीं है। भारत बोध के लिए यहां की सांस्कृतिक विरासत, दर्शन एवं धर्म को समझना आवश्यक है। प्रस्तुत शोधपत्र में भारतीय सांस्कृतिक चिन्तन किन आधारभूत विचारों पर निर्मित हुआ है, वे विचार आज भी हमारे व्यक्तिगत, सामाजिक, राष्ट्रीय तथा वैश्विक जीवन को किस प्रकार दिशा दे सकते हैं – इन विषयों पर विमर्श किया गया है। भारतीय सांस्कृतिक चिन्तन के मूल आधारस्तम्भों यथा – सततता, सहिष्णुता, विचार स्वातन्त्र्य, दुःखों से निवृत्ति की भावना, भेद से अभेद की प्रवृत्ति, लोक एवं शास्त्र का अद्भुत समन्वय, पारभौतिकता, कर्तव्यपरायणता, ज्ञान केन्द्रितता, लोकमंगल की भावना के आधार पर विवेचन प्रस्तुत किया गया है।
Key Words : अविच्छिन्नता, पारभौतिकता, ज्ञानकेन्द्रितता, विश्व-कल्याण, मुक्ति, अभेद।
Publication Details:
Journal : Sanvahak (संवाहक)
ISSN : 3108-1347 (Online)
Published In : Volume-2 | Issue-3, July-Sept., 2026
Page Number(s) : 46-50
Publisher Name :
Mrs Anubha Chaudhary | https://sanvahak.gyanvividha.com | E-ISSN : 3108-1347




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